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Business News: SoftBank ने फिर घटाई Lenskart में हिस्सेदारी, ₹2,888 करोड़ में बेच डाले 4.5 करोड़ शेयर

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | SoftBank ने Lenskart में 4.5 करोड़ शेयर ₹2,887.87 करोड़ में बेचे। कंपनी में सॉफ्टबैंक की हिस्सेदारी 9.86% से घटकर 7.28% रह गई।

डेस्क, नई दिल्ली, 25 अगस्त। आईवियर कंपनी लेंसकार्ट सॉल्यूशंस के शेयरों में मंगलवार को निवेशकों की नजर बनी रही। इसकी बड़ी वजह जापान के दिग्गज निवेशक सॉफ्टबैंक की कंपनी में एक और बड़ी हिस्सेदारी बिक्री रही। सॉफ्टबैंक ने अपनी सहयोगी कंपनी SVF II Lightbulb (Cayman) Ltd के जरिए लेंसकार्ट के 4.5 करोड़ इक्विटी शेयर बेच दिए। ब्लॉक डील के जरिए हुई इस बिक्री की कुल कीमत करीब ₹2,887.87 करोड़ रही।

BSE के ब्लॉक डील आंकड़ों के मुताबिक शेयरों की बिक्री औसतन ₹641.75 प्रति शेयर के भाव पर हुई। यह कंपनी की कुल इक्विटी का करीब 2.58 प्रतिशत हिस्सा है। इस बिक्री के बाद लेंसकार्ट में सॉफ्टबैंक की हिस्सेदारी 9.86 प्रतिशत से घटकर 7.28 प्रतिशत रह गई है। इसके बावजूद सॉफ्टबैंक कंपनी के प्रमुख सार्वजनिक शेयरधारकों में बना हुआ है।

दो महीने में दूसरी बड़ी हिस्सेदारी बिक्री

लेंसकार्ट में यह सॉफ्टबैंक की हालिया दूसरी बड़ी हिस्सेदारी बिक्री है। इससे पहले जून 2026 में भी सॉफ्टबैंक ने कंपनी के करीब 3.25 प्रतिशत शेयर बेचे थे। उस समय डील की कीमत लगभग ₹2,873 करोड़ थी।

यानी कुछ ही महीनों के अंतराल में सॉफ्टबैंक ने लेंसकार्ट में दो बड़े ब्लॉक डील के जरिए अपनी हिस्सेदारी कम की है। ताजा बिक्री के बाद कंपनी में सॉफ्टबैंक की हिस्सेदारी 7.28 प्रतिशत रह गई है।

हालांकि, लगातार हिस्सेदारी बेचने का मतलब अपने आप में यह नहीं है कि कंपनी के कारोबार को लेकर सॉफ्टबैंक का नकारात्मक रुख है। बड़े संस्थागत निवेशक कई बार निवेश से मुनाफा निकालने, पोर्टफोलियो को संतुलित करने या लॉक-इन अवधि समाप्त होने के बाद हिस्सेदारी कम करने की रणनीति अपनाते हैं। इसलिए केवल हिस्सेदारी बिक्री के आधार पर कंपनी के भविष्य को लेकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

कौन-कौन बने लेंसकार्ट के खरीदार?

ब्लॉक डील में घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों ने लेंसकार्ट के शेयर खरीदे। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक नेशनल पेंशन सिस्टम ट्रस्ट के अलावा SBI, Edelweiss, Nippon India, Franklin Templeton, HDFC, HSBC, ICICI Prudential, Motilal Oswal और Sundaram से जुड़े म्यूचुअल फंड भी खरीदारों में शामिल रहे।

ICICI Prudential Life Insurance ने भी कंपनी के शेयर खरीदे। इससे संकेत मिलता है कि सॉफ्टबैंक की हिस्सेदारी का एक बड़ा हिस्सा संस्थागत निवेशकों के बीच वितरित हुआ।

विदेशी निवेशकों में फ्रांस की वित्तीय सेवा कंपनी Societe Generale प्रमुख खरीदार रही। उसने 1,07,35,000 शेयर खरीदे, जो लेंसकार्ट की कुल हिस्सेदारी का करीब 0.62 प्रतिशत है। इन शेयरों की डील वैल्यू लगभग ₹688.91 करोड़ रही।

इसके अलावा Goldman Sachs ने करीब 84.31 लाख शेयर लगभग ₹541.06 करोड़ में खरीदे। Motilal Oswal Mutual Fund ने 47.71 लाख शेयर करीब ₹306.17 करोड़ में खरीदे, जबकि Vanguard Group ने लगभग 37.28 लाख शेयर ₹239.2 करोड़ में खरीदे।

Ghisallo Capital Management, Morgan Stanley, BNP Paribas Financial Markets, Wasatch Global Investors और Integrated Core Strategies Asia समेत कई अन्य संस्थागत निवेशक भी इस ब्लॉक डील में शामिल रहे।

शेयर बाजार में क्या हुआ?

सॉफ्टबैंक की हिस्सेदारी बिक्री की खबर के बीच लेंसकार्ट का शेयर मंगलवार को ₹656.15 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में शेयर ₹670.40 तक पहुंचा था। मार्केट डेटा के अनुसार 24 अगस्त को कंपनी के शेयर ने करीब ₹673.35 का नया 52-सप्ताह हाई छुआ था।

इसका मतलब यह है कि सॉफ्टबैंक की बड़ी हिस्सेदारी बिक्री की खबर के बावजूद शेयर ने मंगलवार के कारोबार में अपने ऊपरी स्तरों को छुआ, हालांकि अंत में यह ₹656.15 पर बंद हुआ।

शेयर में हालिया तेजी को कंपनी के मजबूत तिमाही प्रदर्शन के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। बाजार में लेंसकार्ट की कमाई और स्टोर विस्तार को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है।

जून तिमाही में मुनाफा कई गुना बढ़ा

लेंसकार्ट के लिए जून 2026 की तिमाही कारोबारी प्रदर्शन के लिहाज से मजबूत रही। कंपनी का समेकित शुद्ध मुनाफा बढ़कर ₹221.84 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹60.08 करोड़ था। यानी सालाना आधार पर मुनाफे में करीब 269 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

कंपनी की बिक्री भी तेजी से बढ़ी। जून तिमाही में परिचालन आय ₹2,714.18 करोड़ रही, जो एक साल पहले की समान अवधि में ₹1,894.46 करोड़ थी। इस तरह कंपनी की बिक्री में करीब 43.27 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

लेंसकार्ट के कारोबार में स्टोर विस्तार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कंपनी ने जून तिमाही के दौरान 132 नए स्टोर जोड़े। इसके बाद सक्रिय स्टोर की कुल संख्या 3,459 तक पहुंच गई।

सॉफ्टबैंक की हिस्सेदारी अब कितनी?

जून 2026 के शेयरहोल्डिंग आंकड़ों के अनुसार सॉफ्टबैंक के पास लेंसकार्ट में 9.86 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। ताजा 2.58 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री के बाद यह हिस्सा घटकर 7.28 प्रतिशत रह गया है। सॉफ्टबैंक अब भी कंपनी के प्रमुख सार्वजनिक शेयरधारकों में शामिल है।

वहीं, Abu Dhabi Investment Authority से जुड़े Platinum Jasmine A 2018 Trust के पास करीब 9.77 प्रतिशत हिस्सेदारी है और वह सबसे बड़ा सार्वजनिक शेयरधारक बना हुआ है।

निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह खबर?

लेंसकार्ट में सॉफ्टबैंक की लगातार दूसरी बड़ी हिस्सेदारी बिक्री ने बाजार में इस कंपनी को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। एक तरफ कंपनी का मुनाफा और राजस्व मजबूत गति से बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ शुरुआती बड़े निवेशकों में शामिल सॉफ्टबैंक धीरे-धीरे अपनी हिस्सेदारी कम कर रहा है।

निवेशकों के लिए दोनों पहलुओं को अलग-अलग देखना जरूरी है। हिस्सेदारी बिक्री कंपनी के प्रमोटर या कारोबार की कमजोरी का सीधा प्रमाण नहीं है, जबकि मजबूत तिमाही नतीजे कंपनी की मौजूदा कारोबारी स्थिति की तस्वीर पेश करते हैं।

इसके अलावा, बड़ी ब्लॉक डील में कई घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों की भागीदारी यह बताती है कि कंपनी के शेयरों में बड़े निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। हालांकि, किसी भी शेयर में निवेश का फैसला केवल एक खबर या एक तिमाही के प्रदर्शन के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।

आगे बाजार की नजर किन बातों पर?

अब बाजार की नजर लेंसकार्ट के अगले तिमाही प्रदर्शन, स्टोर विस्तार की गति, मुनाफे में वृद्धि और संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी पर रहेगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि सॉफ्टबैंक आगे कंपनी में अपनी हिस्सेदारी को लेकर क्या कदम उठाता है।

फिलहाल ताजा ब्लॉक डील ने लेंसकार्ट के शेयर को एक बार फिर बाजार के केंद्र में ला दिया है। करीब ₹2,888 करोड़ की यह डील न केवल सॉफ्टबैंक की हिस्सेदारी घटाने के लिहाज से बड़ी है, बल्कि इसमें देश-विदेश के कई बड़े संस्थागत निवेशकों की भागीदारी भी इसे महत्वपूर्ण बनाती है।

मजबूत नतीजे बनाम बड़ी बिकवाली, लेंसकार्ट के लिए बाजार का अगला इम्तिहान

लेंसकार्ट को लेकर मौजूदा तस्वीर के दो पहलू हैं। पहला, कंपनी की कमाई और कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। जून तिमाही में मुनाफे में करीब 269 प्रतिशत और बिक्री में 43 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि इसका संकेत देती है। दूसरी तरफ सॉफ्टबैंक लगातार अपनी हिस्सेदारी कम कर रहा है।

दोनों घटनाओं को एक ही नजर से देखना सही नहीं होगा। सॉफ्टबैंक की हिस्सेदारी बिक्री निवेश रणनीति का हिस्सा हो सकती है, जबकि कंपनी के तिमाही नतीजे उसके कारोबार की वास्तविक स्थिति को दिखाते हैं।

लेंसकार्ट के लिए सबसे अहम चुनौती अब इस कारोबारी रफ्तार को लंबे समय तक बनाए रखने की होगी। 3,459 सक्रिय स्टोर और लगातार नए स्टोर जोड़ने की रणनीति कंपनी को विस्तार दे रही है, लेकिन इसके साथ लागत, मार्जिन और मुनाफे की गुणवत्ता पर भी निवेशकों की नजर रहेगी।

आने वाली तिमाहियां यह तय करेंगी कि लेंसकार्ट अपनी मौजूदा ग्रोथ को कितनी मजबूती से आगे बढ़ा पाती है। फिलहाल बाजार में कंपनी के शेयर और सॉफ्टबैंक की अगली रणनीति दोनों पर नजर बनी हुई है।

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Lenskart के तिमाही नतीजों और शेयर बाजार से जुड़ी अन्य खबरें Alam Ki Khabar पर पढ़ें।

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